धनबाद। IndustrialPunch : खनन उद्योग में चट्टानों को तोड़ने के लिए होने वाली पारंपरिक ब्लास्टिंग का सुरक्षित विकल्प तैयार करने की दिशा में CSIR-केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान (CIMFR), धनबाद ने महत्वपूर्ण सफलता हासिल की है। संस्थान के वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें बारूद अथवा पारंपरिक विस्फोटक का इस्तेमाल किए बिना कठोर चट्टानों को तोड़ा जा सकता है।
भारत में पहली बार CPTBT यानी Carbon Phase Transition Rock Breaking Technique का सफल परीक्षण तमिलनाडु की कल्लाकुडी लाइमस्टोन माइंस में किया गया। यह परीक्षण डालमिया भारत सीमेंट्स लिमिटेड की खदान में किया गया। परीक्षण को खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS) की मंजूरी मिलने के बाद अंजाम दिया गया।
धमाका नहीं, CO₂ का दबाव तोड़ेगा चट्टान
CPTBT की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें चट्टान तोड़ने के लिए पारंपरिक विस्फोटक की जरूरत नहीं पड़ती। सामान्य ब्लास्टिंग के दौरान कंपन, तेज आवाज, धूल, हवा का दबाव और पत्थरों के छिटकने जैसी समस्याएं सामने आती हैं। इसके कारण आबादी वाले इलाकों, मकानों, स्कूलों तथा अन्य संवेदनशील संरचनाओं के आसपास खनन चुनौतीपूर्ण हो जाता है। CIMFR की नई तकनीक ऐसे क्षेत्रों में सुरक्षित एवं नियंत्रित तरीके से चट्टान तोड़ने का विकल्प उपलब्ध करा सकती है।
विशेष रूप से उन क्षेत्रों में इसका उपयोग महत्वपूर्ण हो सकता है, जहां संवेदनशील संरचनाओं से करीब 50 से 100 मीटर के दायरे में खनिज भंडार मौजूद हैं और पारंपरिक ब्लास्टिंग की अनुमति या व्यावहारिक संभावना सीमित होती है।
कैसे काम करती है CPTBT तकनीक?
इस तकनीक में सबसे पहले चट्टान में निर्धारित आकार और गहराई तक छेद किया जाता है। इसके बाद एक विशेष ट्यूब में तरल कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) भरी जाती है।
विद्युत प्रवाह मिलने पर रासायनिक हीटर गर्म होता है और तरल CO₂ गैस में परिवर्तित होने लगती है। गैस का दबाव निर्धारित स्तर तक पहुंचने पर डिस्क टूटती है और उच्च दबाव वाली गैस तेजी से बाहर निकलती है।
गैस के इसी तीव्र विस्तार और दबाव से चट्टान में नियंत्रित दरार पैदा होती है और चट्टान टूट जाती है। यानी पारंपरिक बारूदी विस्फोट की जगह कार्बन डाइऑक्साइड के Phase Transition से उत्पन्न दबाव का इस्तेमाल किया जाता है।
सुरक्षित खनन के लिए खुल सकती है नई राह
इस तकनीक के सफल प्रयोग से उन खदानों में खनन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, जहां सुरक्षा अथवा पर्यावरण संबंधी कारणों से पारंपरिक विस्फोटकों का इस्तेमाल मुश्किल है।
कंपन, शोर, धूल और फ्लाइंग रॉक जैसे जोखिमों को कम करने की क्षमता के कारण यह तकनीक खनन उद्योग के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
CIMFR वैज्ञानिकों की टीम ने किया सफल परीक्षण
इस परियोजना का नेतृत्व CIMFR के निदेशक प्रो. अरविंद कुमार मिश्रा ने किया। प्रोजेक्ट लीडर डॉ. नारायण भगत के साथ डॉ. जितेंद्र पांडेय, डॉ. सी. सौम्लियाना, आदित्य प्रसाद और राकेश कुमार सिंह टीम में शामिल रहे।
सफल परीक्षण के बाद अब CPTBT तकनीक ने ऐसे खनन क्षेत्रों के लिए एक नया विकल्प प्रस्तुत किया है, जहां पारंपरिक ब्लास्टिंग सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रतिबंधों के कारण चुनौती बनी हुई है।
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