देश में गैर-कानूनी कोयला माइनिंग से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) को और ताकत देने का फैसला किया है। इस फैसले में अब सीआईएसएफ को कानूनी कार्रवाई शुरू करने की भी ताकत मिली है। इससे पहले ऐसी ताकतें रेलवे प्रोटेक्शन फोर्स को अपने अधिकारी क्षेत्र में मिलती हैं।
सीआईएसएफ के डायरेक्टर जनरल प्रवीर रंजन ने बताया कि सरकार ने माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 में बदलाव किए हैं, ताकि सीआईएसएफ को कानूनी नियमों को लागू करने का अधिकार मिल सके। अभी CISF का काम देश की 10 कोयला खदानों की सुरक्षा तक ही सीमित है और इसे लागू करने का अधिकार सिर्फ राज्य के माइनिंग अधिकारियों और लोकल पुलिस के पास है। नई शक्तियों से ब्प्ैथ् सीधे नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर सकेगी।
माइंस अधिकारियों ने बताया कि गैर-कानूनी कोयला माइनिंग से देश के रिसोर्स, पब्लिक सेफ्टी, एनवायरनमेंट और कानूनी कमर्शियल ऑपरेशन को गंभीर खतरा है। इससे सरकारी खजाने को रेवेन्यू का नुकसान होता है, सही माइनिंग कमजोर होती है, वर्कर्स को खतरा होता है और बिना रेगुलेटेड कार्बन एमिशन होता है। CISF और दूसरे सिक्योरिटी फोर्स की तैनाती, टेक्नोलॉजी से चलने वाले मॉनिटरिंग सिस्टम और पब्लिक रिपोर्टिंग के लिए खनन प्रहरी ऐप के बावजूद गैर-कानूनी माइनिंग अभी भी जारी है।
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