नई दिल्ली | IndustrialPunch : भारत के इस्पात उद्योग ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है। इस अवधि में कच्चे इस्पात, तैयार स्टील और इस्पात की घरेलू खपत में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वहीं, देश की कच्चे इस्पात उत्पादन क्षमता बढ़कर 222 मिलियन टन प्रतिवर्ष (MTPA) तक पहुंच गई है, जो राष्ट्रीय इस्पात नीति-2030 के 300 MTPA लक्ष्य की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति है।
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उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी
जून 2026 में भारत का कच्चे इस्पात उत्पादन 14.1 मिलियन टन रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 4.5% अधिक है। अप्रैल-जून तिमाही में कुल उत्पादन 42.1 मिलियन टन रहा, जिसमें 3% की वृद्धि दर्ज की गई।
इसी तरह तैयार स्टील का उत्पादन जून में 13.5 मिलियन टन रहा, जबकि पहली तिमाही में यह 40.6 मिलियन टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 4.9% अधिक है।
घरेलू मांग में मजबूती
देश में तैयार इस्पात की खपत भी लगातार बढ़ रही है। अप्रैल-जून 2026 के दौरान घरेलू खपत 41.6 मिलियन टन रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में 8.3% अधिक है। यह निर्माण, बुनियादी ढांचा और विनिर्माण क्षेत्रों में मजबूत मांग का संकेत है।
भारत बना तैयार स्टील का शुद्ध आयातक
रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 के दौरान भारत तैयार इस्पात का शुद्ध आयातक रहा। इस अवधि में 20.64 लाख टन तैयार स्टील का आयात हुआ, जबकि 15.93 लाख टन का निर्यात किया गया। आयात में चीन, कोरिया और जापान प्रमुख स्रोत रहे।
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सरकार का फोकस क्षमता विस्तार और ग्रीन स्टील पर
इस्पात मंत्रालय ने बताया कि देश में क्षमता विस्तार, हरित इस्पात (Green Steel), आधुनिक अवसंरचना और कच्चे माल की निर्बाध आपूर्ति पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। SAIL, MECON और RITES सहित कई संस्थानों ने नई परियोजनाओं और अवसंरचना विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। साथ ही, 15 राज्यों के 97 उत्पादकों को ग्रीन स्टील प्रमाणपत्र भी जारी किए गए हैं।
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