एसईसीएल सीएमडी हरीश दुहन industrialpunch.com के चीफ एडिटर के साथ चर्चा करते हुए
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बिलासपुर, 31 दिसम्बर। कोल इंडिया (CIL) की दूसरी बड़ी कोयला उत्पादक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के लिए वर्ष 2025 तमाम चुनौतियों के साथ उपलब्धियों से भरा रहा है। साल अंतिम दिवस यानी 31 दिसम्बर को सीएमडी हरीश दुहन ने एसईसीएल मुख्यालय में industrialpunch.com के चीफ एडिटर मोहम्मद सादिक शेख के साथ कंपनी के कामकाज को लेकर लंबी चर्चा की। सीएमडी ने कहा कि एसईसीएल फिर से नम्बर एक की पोजिशन पर आने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है। कंपनी से जुड़ा प्रत्येक व्यक्ति पूरे जोश और जुनून के साथ अपना योगदान दे रहा है। सीएमडी हरीश दुहन से बातचीत के प्रमुख अंश :

नववर्ष 2026 के आरंभ पर, जब आप 2025 की ओर देखते हैं, तो एसईसीएल के लिए इस वर्ष को आप किन शब्दों में परिभाषित करेंगे?

वर्ष 2025 एसईसीएल के लिए चुनौतियों के बीच ठोस प्रगति का वर्ष रहा जिसने हमारे उत्पादन की नींव को मजबूत किया। अधिक मानसून, भूमि अधिग्रहण और लॉजिस्टिक्स जैसी बाधाओं के बावजूद हमने भूमि एवं पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। इसका परिणाम यह रहा कि अप्रैल से नवंबर 2025 के बीच कोरबा स्थित हमारी मेगा परियोजनाओं के लिए 236 हेक्टेयर भूमि का पजेशन प्राप्त किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह आंकड़ा मात्र 29 हेक्टेयर था। इसी तरह भूमि स्वामियों के दावों के त्वरित निपटारे पर फोकस करते हुए मुआवज़ा भुगतान ₹74 करोड़ से बढ़कर ₹241 करोड़ तक पहुँच गया। पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई और 736 परियोजना-प्रभावित परिवारों का सफल पुनर्वास किया गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह संख्या 163 परिवारों की थी। ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं, बल्कि यह दर्शाते हैं कि एसईसीएल ने विकास और सामाजिक जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाते हुए भरोसे और साझेदारी के साथ आगे बढ़ने का प्रयास किया है। यह प्रगति आने वाले वर्षों में उत्पादन विस्तार और राष्ट्रीय ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने की मजबूत नींव तैयार करती है।

वर्ष 2025 चुनौतियों और उपलब्धियों दोनों का वर्ष रहा। उत्पादन, तकनीक और बुनियादी ढांचे के स्तर पर आप किस उपलब्धि को महत्वपूर्ण मानते हैं?

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मेरे दृष्टिकोण से 2025 की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और रोजगार सृजन के क्षेत्र में मिली प्रगति है जिसके फलस्वरूप हमें उत्पादन बढ़ाने और लक्ष्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी। इस कैलेंडर वर्ष में 750 से अधिक भू-विस्थापितों को रोजगार प्रदान किया गया, जो हमारी समावेशी विकास नीति को दर्शाता है। इसके साथ ही, यह वर्ष कोयला उद्योग में नारी शक्ति के सशक्तिकरण के लिए भी याद किया जाएगा। बिलासपुर मुख्यालय में कोल इंडिया की पहली पूर्णतः महिला-संचालित डिस्पेंसरी, गेवरा में ऑल-वुमन सीबीएम लैब और कोरबा में पहली ऑल-वुमन सेंट्रल स्टोर यूनिट की शुरुआत ने यह सिद्ध किया कि महिलाएँ हर क्षेत्र में नेतृत्व करने में सक्षम हैं।

एसईसीएल ने भूमिगत खनन, पेस्ट फिल तकनीक और कंटीन्यूअस माइनर जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं। क्या आप 2026 को “टेक्नोलॉजी ड्रिवन ट्रांसफॉर्मेशन” का वर्ष मानते हैं?

निश्चित रूप से, 2026 को हम “टेक्नोलॉजी ड्रिवन ट्रांसफॉर्मेशन” के वर्ष के रूप में देख रहे हैं। भूमिगत खनन में पेस्ट फिल तकनीक को अपनाने वाला पहला कोल PSU बनने की दिशा में हमारे कदम से न सिर्फ भूमिगत खदानों से ज़्यादा उत्पादन हो सकेगा साथ ही साथ आस-पास के ईको-सिस्टम पर भी न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा और खनन और सुरक्षित होगा। इसके साथ ही कंटीन्यूअस माइनर का विस्तार और ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्वदेशी उपकरणों को प्रोत्साहन- ये सभी पहल सुरक्षित, टिकाऊ और भविष्य-उन्मुख खनन की ओर संकेत करती हैं। तकनीक के माध्यम से हम उत्पादकता के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दे रहे हैं।

देश की बढ़ती ऊर्जा मांग और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को देखते हुए, आने वाले वर्ष में एसईसीएल की रणनीतिक प्राथमिकताएं क्या होंगी?

देश की बढ़ती ऊर्जा मांग और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए 2026 में एसईसीएल की रणनीतिक प्राथमिकताएं पूरी तरह स्पष्ट हैं। हमारा फोकस उत्पादन को बढ़ाने के साथ-साथ गुणवत्ता, सुरक्षा और सततता पर समान रूप से रहेगा। हम यह मानते हैं कि केवल अधिक उत्पादन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि सुरक्षित खनन, बेहतर कोयला गुणवत्ता और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इसके साथ ही तकनीक और आधुनिक लॉजिस्टिक्स के माध्यम से परिचालन दक्षता बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा, ताकि उत्पादन और डिस्पैच दोनों में स्थिरता लाई जा सके। हमारे लिए हमारे लोग और हमारे समुदाय इस विकास यात्रा का केंद्र हैं। इसलिए कर्मचारियों की सुरक्षा, कौशल विकास और कल्याण के साथ-साथ परियोजना प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों की आवश्यकताओं और अपेक्षाओं का भी पूरा ध्यान रखा जाएगा। हमारा लक्ष्य है कि एसईसीएल न केवल देश की ऊर्जा जरूरतों को मजबूती से पूरा करे, बल्कि जिम्मेदार और संवेदनशील सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम के रूप में सतत विकास का उदाहरण भी बने।

रेल कॉरिडोर, एफएमसी और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में किए गए निवेश का 2026 में एसईसीएल की उत्पादन और डिस्पैच क्षमता पर क्या प्रभाव देखने को मिलेगा?

रेल कॉरिडोर और एफएमसी में किए गए निवेश का प्रभाव 2026 में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। CERL के फेज-1 में खरसिया से धरमजयगढ़ तक 124 किलोमीटर लंबी रेल लाइन (जिसमें से 99 किलोमीटर पहले ही कमीशन हो चुके हैं) 2026 में पूर्ण रूप से चालू होने की उम्मीद है। इसी तरह CEWRL के अंतर्गत गेवरा रोड से पेंड्रा रोड तक 155 किलोमीटर लंबी रेल लाइन भी 2026 में कमीशन होने की दिशा में है। फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (FMC) के तहत अब तक 151 मिलियन टन क्षमता की परियोजनाएँ चालू हो चुकी हैं। 2026 में लगभग 35 मिलियन टन अतिरिक्त FMC क्षमता के कमीशन होने की संभावना है और आने वाले वर्षों में कुल FMC क्षमता को 241 मिलियन टन तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इन परियोजनाओं से न केवल कोयला डिस्पैच तेज़ और अधिक विश्वसनीय होगा, बल्कि सड़क परिवहन पर निर्भरता घटेगी, लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी और पर्यावरणीय प्रभाव भी न्यूनतम होगा। इससे एसईसीएल की उत्पादन-डिस्पैच क्षमता को दीर्घकालिक मजबूती मिलेगी।

एसईसीएल के लिए “मानव संसाधन” हमेशा एक मजबूत आधार रहा है। नए वर्ष में कर्मचारियों और श्रमिकों के कौशल, सुरक्षा और मनोबल को लेकर आपकी क्या सोच है?

मानव संसाधन एसईसीएल की सबसे बड़ी ताकत है। नए वर्ष में हमारा फोकस कर्मचारियों और श्रमिकों के कौशल विकास, सुरक्षा प्रशिक्षण और स्वास्थ्य सुविधाओं को और सुदृढ़ करने पर रहेगा। हमारा प्रयास है कि हर कर्मचारी सुरक्षित, सम्मानित और प्रेरित महसूस करे, ताकि वह संगठन की प्रगति में अपनी पूरी क्षमता के साथ योगदान दे सके।

नारी शक्ति के बढ़ते योगदान ने एसईसीएल की कार्यसंस्कृति को नया आयाम दिया है। आने वाले समय में महिलाओं की भागीदारी को और सशक्त बनाने के लिए क्या नई पहलें प्रस्तावित हैं?

नारी शक्ति के बढ़ते योगदान ने एसईसीएल की कार्यसंस्कृति को वास्तव में नया आयाम दिया है। वर्ष 2025- 26 के दौरान हमने महिला सशक्तिकरण की दिशा में कुछ ऐतिहासिक पहलें की हैं। एसईसीएल ने कोल इंडिया की पहली पूर्णतः महिला-संचालित डिस्पेंसरी की शुरुआत की है, जहाँ चिकित्सकीय सेवाओं से लेकर प्रशासन तक सभी जिम्मेदारियाँ महिलाएँ निभा रही हैं। इसी तरह, गेवरा स्थित सीईडब्ल्यूएस (CEWS) में ऑल-वुमन सीबीएम लैब का संचालन महिलाओं द्वारा किया जा रहा है, जो तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में उनकी क्षमता को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त, कोल इंडिया की पहली ऑल-वुमन सेंट्रल स्टोर यूनिट की स्थापना भी एसईसीएल में की गई है, जहाँ सामग्री प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स जैसे कोर औद्योगिक कार्यों का संचालन महिलाएँ कर रही हैं। आने वाले समय में हमारा प्रयास है कि तकनीकी, परिचालन और नेतृत्व भूमिकाओं में महिलाओं की भागीदारी और बढ़े, ताकि नारी शक्ति एसईसीएल की प्रगति यात्रा की सशक्त साझेदार बनी रहे।

पर्यावरण संरक्षण और कोयला उत्पादन के बीच संतुलन आज एक बड़ी चुनौती है। 2026 में एसईसीएल किस तरह “ग्रीन और रेस्पोंसिबल माइनिंग” को और आगे ले जाने की योजना बना रहा है?

कोयला उत्पादन के साथ पर्यावरण संरक्षण एसईसीएल की प्राथमिकताओं में हमेशा से रहा है। वर्ष 2026 में हम “ग्रीन और रिस्पॉन्सिबल माइनिंग” को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं। मियावाकी तकनीक के तहत विकसित ग्रीन बेल्ट्स को अब और विस्तार दिया जाएगा, ताकि खनन क्षेत्रों में तेजी से हरियाली बढ़ाई जा सके।
इसके साथ ही, हम जिम्मेदार माइन क्लोज़र पर भी विशेष फोकस कर रहे हैं, जिसमें खनन के बाद भूमि का वैज्ञानिक तरीके से पुनर्विकास किया जाता है। कोरबा क्षेत्र में नए इको- पार्क्स विकसित करने की योजना है, ताकि खनन क्षेत्र हरित और उपयोगी सार्वजनिक स्थलों में बदल सकें। नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी एसईसीएल लगातार आगे बढ़ रहा है। वर्तमान में हमारी सोलर पावर क्षमता 41 मेगावाट है और आने वाले वर्षों में इसे 700 मेगावाट तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। हमारा प्रयास है कि भविष्य में एसईसीएल एक नेट ज़ीरो कंपनी के रूप में अपनी पहचान बनाए। इन सभी पहलों के ज़रिये हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि ऊर्जा उत्पादन के साथ पर्यावरण की जिम्मेदारी भी पूरी तरह निभाई जाए।

सीएसआर के माध्यम से शिक्षा, स्वास्थ्य और कौशल विकास में एसईसीएल की भूमिका लगातार बढ़ रही है। क्या आने वाला वर्ष समुदाय-केंद्रित विकास के लिए कोई नई दिशा लेकर आएगा?

सीएसआर (CSR) के माध्यम से एसईसीएल का प्रयास केवल योजनाएँ चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कोयलांचल के लोगों के जीवन में वास्तविक और स्थायी बदलाव लाने का है। हमारी फ्लैगशिप योजनाएँ ‘एसईसीएल के सुश्रुत’ और ‘एसईसीएल की धड़कन’ इसी सोच का उदाहरण हैं। ‘सुश्रुत’ के ज़रिये कोयलांचल के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग मिल रही है, जिससे कई परिवारों का सपना साकार हो रहा है। वहीं ‘धड़कन’ योजना जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों के लिए जीवनदायिनी पहल बनकर सामने आई है और सैकड़ों परिवारों को नई उम्मीद मिली है। वर्ष 2025 में हमने कौशल विकास, स्वास्थ्य और शिक्षा अवसंरचना को मजबूत करने के लिए अनेक संस्थानों के साथ एमओयू किए हैं। इन पहलों के तहत युवाओं को रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण, स्कूलों में स्मार्ट क्लास और डिजिटल शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार, कुपोषण की समस्या से निपटने और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण जैसे क्षेत्रों में काम किया जा रहा है। आने वाले समय में हमारा फोकस इन कार्यक्रमों के विस्तार और उनके ज़मीनी प्रभाव को और गहरा करने पर रहेगा, ताकि कोयलांचल के लोग एसईसीएल की विकास यात्रा के केवल साक्षी नहीं, बल्कि उसके सक्रिय भागीदार बनें।

नववर्ष के इस अवसर पर, आप एसईसीएल परिवार और देशवासियों को क्या संदेश देना चाहेंगे? विशेषकर उस युवा पीढ़ी को जो भारत की ऊर्जा और विकास यात्रा का भविष्य है?

नववर्ष के अवसर पर मैं एसईसीएल परिवार और देशवासियों को यही संदेश देना चाहूँगा कि राष्ट्र की ऊर्जा सुरक्षा हम सबकी साझा जिम्मेदारी है। युवाओं से मेरा आग्रह है कि वे नवाचार, अनुशासन और जिम्मेदारी के साथ आगे बढ़ें। एसईसीएल न केवल आज देश को ऊर्जा दे रहा है, बल्कि आने वाले कल के निर्माण में भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। नया साल अपने साथ नई चुनौतियाँ लेकर आता है, लेकिन साथ ही नए अवसर और नई संभावनाएँ भी देता है। इसी विश्वास के साथ हम 2026 में प्रवेश कर रहे हैं। दृढ़ संकल्प, सकारात्मक सोच और टीमवर्क की भावना के साथ- ताकि आने वाली चुनौतियों का सामना करते हुए एसईसीएल को और मजबूत, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार संगठन बना सकें।

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