संबलपुर, 30 जनवरी। महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड प्रबंधन ने इंटक से सम्बद्ध ओसीएमएस को कंपनी की समस्त समितियों से बाहर का रास्ता दिखाया है। बताया जा रहा है कि भारतीय मजदूर संघ (BMS) इसके लिए लंबे समय से प्रयासरत था।
MCL के महाप्रबंधक (IR) ने 29 जनवरी को सभी एरिया जीएम को इस संदर्भ में एक पत्र जारी किया है। बताया जा रहा है कि इंटक को सभी समितियों से बाहर किए जाने के पीछे मोदी सरकार के केन्द्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का हाथ है। धर्मेंद्र प्रधान ने एमसीएल प्रबंधन को इंटक को समितियों से बाहर करने कहा था। इसके लिए बीएमएस लंबे समय से लगा हुआ था। यहां बताना होगा कि महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड में इंटक सबसे बड़ा यूनियन है और सदस्यता के मामले में टॉप पर बना हुआ था।
जानें जीएम (IR) ने पत्र में क्या लिखा है
यह सूचित किया जाता है कि एमसीएल की वैधानिक/अवैधानिक, द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय समितियों में ओसीएमएस की भागीदारी के संबंध में एक परिचालित ट्रेड यूनियन द्वारा उठाई गई शिकायत के विषय पर, उच्च न्यायालय के एक प्रकरण के निस्तारण के उपरांत, यह मामला परामर्श एवं उपयुक्त दिशा- निर्देश हेतु कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) को संदर्भित किया गया था।
उत्तर में, कार्यकारी निदेशक (मानव संसाधन), सीआईएल द्वारा दिनांक 16.10.2025 के ई-मेल के माध्यम से यह पुष्टि की गई है कि “एमसीएल की द्विपक्षीय अथवा त्रिपक्षीय बैठकों में आईएनटीयूसी को शामिल करने का कोई वैधानिक दायित्व नहीं है। अतः कोयला मंत्रालय के परामर्शदाता का दिनांक 11.01.2017 का आदेश यथावत रहेगा।“
इसके अतिरिक्त, इस कार्यालय के पत्र संदर्भ संख्या एम.सी.एल./का.वि./ओ.सी.एम.एस./2025/1375 दिनांक 14.11.2025 के माध्यम से ओसीएमएस के महासचिव को यह अवसर प्रदान किया गया कि वे यह स्पष्ट करें कि एमसीएल की किसी भी वैधानिक/अवैधानिक, द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय समिति में ओसीएमएस को भागीदारी से क्यों न वंचित किया जाए। ओसीएमएस के महासचिव द्वारा दिनांक 21.11.2025 को महाप्रबंधक (एचआर/एमपी एवं आईआर) को संबोधित पत्र के माध्यम से अपना उत्तर प्रस्तुत किया गया है।
उपरोक्त पत्रों के साथ अन्य संबंधित दस्तावेजों को ओडिशा सरकार के महाधिवक्ता के समक्ष राय हेतु प्रस्तुत किया गया। ओडिशा के महाधिवक्ता द्वारा दिनांक 19.01.2026 को दी गई राय (प्रति संलग्न) में यह कहा गया है-
“मेरी दृढ़ राय है कि एमसीएल की द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय बैठकों में ओसीएमएस को शामिल करने का कोई अनिवार्य प्रावधान नहीं है। अतः एमसीएल में कार्यरत ओसीएमएस यूनियन को एमसीएल की वैधानिक/अवैधानिक, द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय समिति बैठकों में भागीदारी से वंचित किया जा सकता है।“
उपरोक्त के आलोक में यह अवगत कराया जाता है कि अब से एमसीएल के सभी क्षेत्रों में वैधानिक/अवैधानिक, द्विपक्षीय एवं त्रिपक्षीय समितियों में ओसीएमएस को भागीदारी से वंचित किया जाएगा।
Source : Coal News Network
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