नई दिल्ली, 27 जुलाई। संसद की लोक लेखा समिति (PAC) ने दीवान हाउसिंग फाइनेंस कारपोरेशन लिमिटेड (DHFL) में 1,390 करोड़ रुपए के निवेश से निपटने में विफलता के लिए कोयला खान भविष्य निधि संगठन (CMPFO) और कोयला मंत्रालय की खिंचाई की है।
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समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सीएमपीएफओ 864 करोड़ रुपये के गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर को जल्दी भुनाने का विकल्प चुन सकता था, लेकिन ऐसा करने में विफल रहा। ये निवेश 2015 और 2018 के बीच किए गए थे और डिबेंचर भुनाने का निर्णय दिसंबर 2019 में लिया गया था।
मंत्रालय ने कोयला खान भविष्य निधि संगठन आयुक्त के “उदासीन रवैये“ को दोषी ठहराया है, क्योंकि मंत्रालय के संयुक्त सचिव द्वारा ऐसा करने की सलाह दिए जाने के बावजूद उन्होंने इस मुद्दे को तुरंत न्यासी बोर्ड के समक्ष नहीं रखा।
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समिति ने यह भी नोट किया है कि डीएचएफएल 2015 से ही अन्य राज्यों के साथ धन के दुरुपयोग में संलिप्त रहा है। समिति यह जानकर व्यथित है कि डीएचएफएल की स्थिति की अच्छी जानकारी न होने के बावजूद कोयला मंत्रालय के पास स्थिति की गंभीरता का आकलन करने के लिए आवश्यक प्रक्रियाएं और कार्यप्रणाली नहीं थी ताकि पेंशनभोगियों के धन को ऐसे बॉन्ड में निवेश करने से रोका जा सके।
समिति ने कहा है कि सीएमएफपीओ के कामकाज की निगरानी में मंत्रालय की ओर से गंभीर अनियमितता रही है, जिसके कारण प्रतिकूल क्रेडिट रेटिंग के बावजूद डीएचएफएल के डिबेंचर भुनाने में उदासीन रवैये के कारण अपने निवेश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफलता हुई है। समिति की राय है कि इस अपरिहार्य नुकसान को देखते हुए सीएमपीएफओ को अपनी भविष्य की निवेश रणनीतियों का मूल्यांकन करना चाहिए।
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यहां बताना होगा कि सीएमपीएफ ने वर्ष 2014- 15 में डीएचएफएल में 1390 सौ करोड़ रुपए निवेश किया था। इसमें से डीएचएफएल ने 662.58 करोड़ रुपए ही वापस किए और शेष रकम नहीं मिल सकी।









