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जांजगीर-चांपा, 14 जून। लगभग 105 घंटे से बोरवेल में फंसे राहुल को करीब 10.45 बजे रेस्क्यू कर किया गया। राहुल को पहले टनल में रखा गया, फिर प्राथमिक जांच के बाद उसे बिलासपुर स्थित अपोलो अस्पताल के लिए रवाना किया गया। इसके लिए ग्रीन कॉरीडोर तैयार किया गया है। एम्बुलेंस में विशेषज्ञ चिक्तिसकों टीम भी साथ गई है।

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कई बाधाओं को पार कर रेस्क्यू टीम 60 फीट नीचे फंसे बच्चे का बचाने बोरवेल तक पहुंची। बताया जा रहा है कि यह केवल छत्तीसगढ ही नहीं बल्कि देश का सबसे बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन था।

मुख्यमंत्री ने कुछ देर पहले ही ट्वीट किया था किख् अंततः राहुल ने आंखे खोली, बचाव दल को देखकर राहुल ने प्रसन्नता जाहिर की और अपनी आंखें खोली है। इस ऑपरेशन में एक चौंका देने वाली घटना घटी, आज शाम उस बोरवेल में एक सांप आ गया था, लेकिन राहुल की जीवटता से वह खतरा भी टल गया।

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राहुल को बचाने के लिए शुक्रवार से ही एनडीआरएफ, सेना, एसडीआरएफ, एसईसीएल, पुलिस, प्रशासन की 500 लोगों की टीम जुटी हुई थी।

मुख्यमंत्री कार्यालय के ऑफिशिय सोशल प्लेटफार्म पर कहा कि, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सतत मॉनिटरिंग में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, छत्तीसगढ़ पुलिस, भारतीय सेना और जांजगीर जिला ने संयुक्त रूप से ऐतिहासिक कर्तव्यनिष्ठा का पालन करते हुए राहुल को बोरवेल से निकालने का दुष्कर कार्य कर दिखाया है। यह रेस्क्यू ऑपरेशन पूरे देश के लिए मिसाल है। छत्तीसगढ़ ने इतिहास रचा है।

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शुक्रवार दोपहर 2 बजे बोरवेल में गिरा था राहुल

यहां बताना होगा कि छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले के पिहरिद गांव का राहुल साहू, लगभग 11 साल, पिता लाला साहू रोज की तरह दोपहर में घर के पीछे अपनी ही बाड़ी में खेल रहा था। शुक्रवार दोपहर 2 बजे के बाद से उसका कुछ पता नहीं चला है। परिजन भी इस बात से बेखबर थे। उन्हें इस बारे में तब पता चला, जब घर के ही कुछ लोग बाड़ी की तरफ गए। उस दौरान राहुल के रोने की आवाज आ रही थी। गड्ढे के पास जाकर देखने पर पता चला कि आवाज अंदर से आ रही है। बोरवेल का गड्ढा 80 फीट गहरा था। बच्चा मूक- बधिर है और मानसिक रूप से कमजोर है।

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