Tuesday, August 25, 2026
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Raigarh – गारे पाल्मा- II कोल ब्लॉक : अदानी ने 1500 पेड़ों की कटाई शुरू की, ग्रामीण विरोध में उतरे तो पुलिस ने किया गिरफ्तार

बाद में मोदी सरकार ने अडानी द्वारा विकसित कोयला खदान को मंजूरी देने के लिए हस्तक्षेप किया और पर्यावरणीय मंजूरी को बहाल कर दिया गया।

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कोरबा, 26 जून। महाराष्ट्र स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी (Mahagenco) को आबंटित गारे पाल्मा सेक्टर- II कोल ब्लॉक (Gare Palma sector- II coal block) को उत्पादन में लाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए हर भरे वृक्षों की कटाई चल रही है। क्षेत्र के लोग इसके विरोध में उतर आए हैं।

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गोर पाल्मा सेक्टर- II कोल ब्लॉक छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार तहसील में स्थित है। इधर, महाराष्ट्र स्टेट पॉवर जनरेशन कंपनी को कोल ब्लॉक आबंटित है, लेकिन कंपनी ने अदानी इंटरप्राइजेस (Adani Enterprises Limited) को माइन डेवलपर और ऑपरेटर (MDO) नियुक्त कोल ब्लॉक सौंपा है। यानी अदानी इंटरप्राइजेस द्वारा इस कोल ब्लॉक को विकसित करने के साथ ही इसका संचालन किया जाएगा।

गारे पाल्मा सेक्टर- II कोल ब्लॉक का क्षेत्रफल 2583.487 हेक्टेयर है। इसमें 214.869 हेक्टेयर में जंगल है। खदान से 14 गांव प्रभावित हो रहे हैं। अदानी ने खदान को विकसित करने हरे भरे वृक्षों की कटाई शुरू की है।

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ग्राम पंचायत सराईटोला के आश्रित ग्राम मुडागांव में स्थित पेड़ों को काटा जा रहा है। बताया गया है 1500 पेड़ों को काटा जाएगा। ग्रामीणों ने पेड़ कटाई के खिलाफ हाई कोर्ट में याचिका दायर की है, लेकिन सुनवाई के पहले पुलिस की पहरेदारी में हरे भरे पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई। पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे 50 से अधिक ग्रामीण गिरफ्तार हुए हैं। प्रशासन ने कहा है कि पेड़ों की कटाई के लिए विधिवत अनुमति दी गई है।

1059.29 मिलियन टन है कोल रिजर्व

गारे पाल्मा सेक्टर- II कोल ब्लॉक में 1059.29 मिलियन टन (MT) कोल रिजर्व है। माइनिंग लीज एरिया 2583.487 हेक्टेयर है। खदान से सालाना 23.6 मिलियन टन कोयला उत्पादन किया जाएगा। इसमें 22 मिलियन टन ओपनकास्ट से तथा 1.6 मिलियन टन भूमिगत खदान से खनन उत्पादन होगा।

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NGT ने पर्यावरण मंजूरी रद्द की थी, केन्द्र सरकार ने दे दी

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) ने जनवरी 2024 में गारे पाल्मा सेक्टर- II कोयला खदान परियोजना के लिए महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) को दी गई पर्यावरण मंजूरी (EC) रद्द कर दी थी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने कहा था कि सरकारी अधिकारियों ने परियोजना प्रस्तावक के साथ मिलीभगत करके बड़ी संख्या में लोगों को अपनी चिंताओं को व्यक्त करने के लिए ‘सार्वजनिक’ बैठक में भाग लेने का प्रयास करने से रोका था। ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया कि प्रभावित लोगों को गारे पेल्मा प्प् कोयला परियोजना के प्रभावों के बारे में ‘निष्पक्ष, निष्पक्ष, निष्पक्ष और वैध सार्वजनिक सुनवाई’ से वंचित किया गया था। अगर खदान आगे बढ़ती है तो 14 गांवों के हजारों आदिवासी लोगों के घर और आजीविका पर काफी असर पड़ेगा।

बाद में मोदी सरकार ने अडानी द्वारा विकसित कोयला खदान को मंजूरी देने के लिए हस्तक्षेप किया और पर्यावरणीय मंजूरी को बहाल कर दिया गया। परियोजना की पुनर्मान्य पर्यावरणीय मंजूरी 13 अगस्त, 2024 को केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी किया गया।

देखें पेड़ कटाई एवं ग्रामीणों को गिरफ्तार करती पुलिस का वीडियो :

वीडियो साभर : अविनाश पाठक (रायगढ़)

 

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