CIL Head Office
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नई दिल्ली, 22 जनवरी। 16 फरवरी को प्रस्तावित देशव्यापी कामबंद हड़ताल कोल सेक्टर में भी होगी। हड़ताल के लिए कोयला उद्योग के मुद्दे तय करने सोमवार को एचएमएस, इंटक, सीटू और एटक के कोल फेडरेशन के नेताओं की वर्चुअल बैठक हुई।

वर्चुअल बैठक में चारों ट्रेड यूनियन से 10- 10 नेता सम्मिलित हुए। बैठक में अप्रत्यक्ष तरीके एमडीओ, रेवन्यू शेयरिंग के जरिए कोयला खदानों का निजीकरण करना, 9.4.0, कॉन्ट्रेक्ट एम्प्लायमेंट सहित कोल सेक्टर के अन्य मुद्दों को लेकर चर्चा की गई। हड़ताल की मांगों में कोयला उद्योग से संबंधित मुद्दों को सम्मिलित किए जाने और इसका चयन करने एक चार सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। इस कमेटी में इंटक से एसक्यू जमा, सीटू से डीडी रामनंदन, एचएमएस से शिवकुमार यादव, एटक से सीजे जोसेफ शामिल किए गए हैं। यह कमेटी हड़ताल के लिए चार्टर ऑफ डिमांड तैयार करेगी।

industrialpunch.com से चर्चा करते हुए डीडी रामनंदन ने बताया कि 30 जनवरी को कोल इंडिया प्रबंधन को संयुक्त तौर पर हड़ताल पर जाने का नोटिस दिया जाएगा। श्रमिक संगठनों द्वारा सीआईएल और अनुषांगिक कंपनियों में संयुक्त कन्वेंशन, गेट मीटिंग की जाएगी। इंटक नेता एसक्यू जमा और एचएमएस के शिवकुमार यादव ने कहा कि पूरी एकजुटता के साथ कोल सेक्टर में 16 फरवरी की हड़ताल सफल की जाएगी।

बैठक में प्रमुख रूप से एचएमएस से हरभजन सिंह सिद्धु, नाथूलाल पांडेय, शिवकुमार यादव, सीटू से डीडी रामनंदन, जीके श्रीवास्तव, वंश गोपाल चौधरी, इंटक से अनूप सिंह, एसक्यू जमा, सौभाग्य प्रधान, एटक से रमेन्द्र सिंह, हरिद्वार सिंह, सीजे जोसेफ सहित 40 लोग सम्मिलित हुए।

देशव्यापी हड़ताल के ये हैं प्रमुख मुद्दे

यहां बताना होगा कि संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) और केंद्रीय श्रम संगठनों (CTU) एवं महासंघों के मंच ने 16 फरवरी को देशव्यापी हड़ताल और ग्रामीण बंद बुलाने का आह्वान किया है। संयुक्त मंच फसलों के उच्च न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), श्रमिकों को 26,000 रुपए की न्यूनतम मासिक मजदूरी, चार श्रम संहिताओं को निरस्त करने, आईपीसी एवं सीआरपीसी में किए गए संशोधनों को निरस्त करने और रोजगार गारंटी को मौलिक अधिकार बनाने की मांग कर रहा है। श्रमिक संगठन रेलवे, रक्षा, बिजली, कोयला, तेल, इस्पात, दूरसंचार, डाक, बैंक, बीमा, परिवहन, हवाई अड्डों, बंदरगाह के सार्वजनिक उपक्रमों का निजीकरण नहीं करने की भी मांग कर रहे हैं।

ये हैं अन्य मांगे

अन्य मांगों में शिक्षा और स्वास्थ्य का निजीकरण रोकना, नौकरियों में संविदा नियुक्ति पर लगाम, निश्चित अवधि के रोजगार को खत्म करना, प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 200 दिन कार्य और 600 रुपये की दैनिक मजदूरी के साथ मनरेगा को मजबूत करना, पुरानी पेंशन योजना को बहाल करना और संगठित एवं असंगठित दोनो क्षेत्रों में कार्यरत सभी लोगों को पेशन एवं सामाजिक सुरक्षा मुहैया कराना शामिल है।

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