नई दिल्ली | IndustrialPunch : देश में कोयला उत्पादन बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) की अधिकार प्राप्त समिति (Empowered Committee) ने तीन प्रमुख कोयला परियोजनाओं को स्टेज-I वन मंजूरी (Forest Clearance) देने की सिफारिश की है।
इन परियोजनाओं में ओडिशा की अलकनंदा कोल माइंस, छत्तीसगढ़ का पुरुंगा भूमिगत (Underground) कोयला ब्लॉक और पेलमा ओपन कास्ट कोयला खदान परियोजना शामिल हैं।
1,737 हेक्टेयर वन भूमि होगी डायवर्ट
समिति के समक्ष प्रस्तुत प्रस्ताव के अनुसार, इन तीनों परियोजनाओं के लिए कुल 1,737 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन का प्रस्ताव रखा गया है। वन भूमि के उपयोग की अनुमति मिलने के बाद परियोजनाओं के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।
3.30 लाख से अधिक पेड़ों पर संकट
सबसे अधिक प्रभाव ओडिशा की अलकनंदा कोल माइंस परियोजना पर पड़ने की संभावना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस परियोजना के लिए 3.30 लाख से अधिक पेड़ों की कटाई करनी पड़ सकती है, जिससे पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।
कोयला उत्पादन और पर्यावरण के बीच संतुलन की चुनौती
सरकार जहां ऊर्जा सुरक्षा और घरेलू कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए नई परियोजनाओं को आगे बढ़ा रही है, वहीं वन भूमि के बड़े पैमाने पर डायवर्जन और पेड़ों की संभावित कटाई ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
स्टेज-I मंजूरी के बाद परियोजनाओं को आगे बढ़ाने से पहले संबंधित एजेंसियों को वन एवं पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी निर्धारित शर्तों का पालन करना होगा। अंतिम स्वीकृति और अन्य वैधानिक अनुमतियों के बाद ही परियोजनाओं पर आगे की कार्रवाई होगी।
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