नई दिल्ली | IndustrialPunch : भारतीय मजदूर संघ (BMS) ने केंद्र सरकार से श्रमिकों की लंबे समय से लंबित मांगों पर तत्काल निर्णय लेने की मांग करते हुए 17 अगस्त 2026 को पूरे देश में जिला मुख्यालयों, राज्य मुख्यालयों और औद्योगिक क्षेत्रों में व्यापक प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। यह निर्णय 26 से 28 जुलाई 2026 के बीच रांची में आयोजित 161वीं केंद्रीय कार्य समिति (KKS) की बैठक में लिया गया।
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बीएमएस महामंत्री सुरेन्द्र कुमार पाण्डेय ने कहा कि यदि श्रमिकों की प्रमुख मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया, तो संगठन देशव्यापी आंदोलन के माध्यम से सरकार पर दबाव बनाएगा। सभी इकाइयों को 17 अगस्त को “मांग दिवस” के रूप में मनाने, धरना-प्रदर्शन आयोजित करने तथा जिला प्रशासन के माध्यम से प्रधानमंत्री और केंद्रीय श्रम मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।
बीएमएस की प्रमुख मांगें
- न्यूनतम पेंशन ₹1000 से बढ़ाकर ₹7500 करने तथा इसे आयुष्मान भारत योजना से जोड़ना।
- ESIC, EPF और बोनस की सीमा में वृद्धि।
- ग्रेच्युटी की गणना के लिए 15 दिन के स्थान पर 30 दिन का फार्मूला लागू करना।
- पुरानी पेंशन योजना (OPS) की बहाली।
- सभी प्रकार के स्कीम वर्करों के मानदेय में वृद्धि।
- समान कार्य के लिए समान वेतन का सिद्धांत, जिसमें संविदा कर्मचारी भी शामिल हों।
- महंगाई के अनुरूप न्यूनतम मजदूरी बढ़ाना।
- पांच दिवसीय कार्य सप्ताह लागू करना।
- HEC रांची और 23 राष्ट्रीय वस्त्र मिलों के कर्मचारियों के लंबित वेतन का भुगतान।
- श्रमिक विरोधी प्रावधानों में संशोधन।
बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि ILO द्वारा “Decent Work on the Platform Economy” संबंधी कन्वेंशन को अपनाने के विषय में देशभर में जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। साथ ही BRICS ट्रेड यूनियन फोरम की हैदराबाद घोषणा का स्वागत करते हुए भविष्य के कौशल, मानव-केंद्रित AI, महिलाओं के भविष्य के कार्य और सामाजिक सुरक्षा जैसे विषयों पर आगे भी कार्य जारी रखने का निर्णय लिया गया। बैठक में 173 प्रतिनिधियों, जिनमें 32 महिला प्रतिनिधि भी शामिल थीं, ने भाग लिया।
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BMS का यह आंदोलन केवल वेतन या पेंशन तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, श्रम कानूनों, न्यूनतम मजदूरी, संविदा कर्मचारियों के अधिकार और पुरानी पेंशन जैसे व्यापक मुद्दों को केंद्र में रखता है। 17 अगस्त का प्रस्तावित देशव्यापी प्रदर्शन सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच आगामी संवाद की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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