नई दिल्ली। IndustrialPunch : नए श्रम कानूनों के श्रमिक-विरोधी प्रावधानों को लेकर भारतीय मजदूर संघ (BMS) के शीर्ष नेतृत्व ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया के साथ उच्चस्तरीय वार्ता की। 1 सितंबर 2026 को जारी BMS की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, संगठन ने विभिन्न विवादित प्रावधानों पर अपनी आपत्तियां और सुझाव सरकार के समक्ष रखे, जिसके बाद श्रम मंत्री ने मुद्दों पर संज्ञान लेते हुए शीघ्र सुधार एवं आवश्यक संशोधन का आश्वासन दिया।
यह वार्ता 17 अगस्त, 2026 को BMS के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बाद हुई। BMS प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री तथा केंद्रीय वित्त मंत्री को मांगों का ज्ञापन भी सौंपा था। इसके बाद श्रम मंत्री के साथ विस्तृत समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में BMS के अखिल भारतीय अध्यक्ष मुकेश मल्होत्रा, महामंत्री सुरेंद्र कुमार पांडेय, संगठन मंत्री बी. सुरेंद्र, पूर्व अध्यक्ष हिरण्मय पंड्या और पूर्व अध्यक्ष साजी नारायण जी सहित केंद्रीय नेतृत्व के प्रतिनिधि मौजूद रहे। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह श्रमिकों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।
सामाजिक सुरक्षा में बढ़ोतरी की मांग
BMS ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़े प्रावधानों में सुधार की मांग रखी। संगठन ने भविष्य निधि (EPF) की सीलिंग ₹15,000 से बढ़ाकर ₹30,000, बोनस सीलिंग ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 तथा ESI की सीलिंग ₹21,000 से बढ़ाकर ₹42,000 करने की मांग की है।
Standing Orders की सीमा घटाने का सुझाव
औद्योगिक श्रम संहिता 2020 और Standing Orders को लागू करने के लिए निर्धारित 300 श्रमिकों की सीमा को घटाकर 100 करने का आग्रह किया गया। BMS का तर्क है कि इससे अधिक प्रतिष्ठानों को इसके दायरे में लाया जा सकेगा और श्रमिकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
Fixed Term Employment पर भी आपत्ति
BMS ने निश्चित अवधि रोजगार (Fixed Term Employment) को केवल स्थायी मानवशक्ति के 20 प्रतिशत तक सीमित करने की मांग रखी है। साथ ही नियमित प्रकृति के कार्यों में स्थायी रोजगार बहाल करने पर जोर दिया गया है।
ट्रेड यूनियन से जुड़े प्रावधानों में बदलाव की मांग
संगठन ने ट्रेड यूनियन की मान्यता के लिए 51 प्रतिशत सदस्यता की शर्त तथा निगोशिएटिंग काउंसिल के लिए निर्धारित 20 प्रतिशत की शर्त को अव्यावहारिक बताते हुए इसमें व्यावहारिक सुधार का सुझाव दिया। इसके अलावा, ट्रेड यूनियन पंजीकरण प्रक्रिया में ‘डीड रजिस्ट्रेशन’ का प्रावधान कानून में जोड़ने की मांग भी BMS ने रखी है।
‘कामगार’ की परिभाषा और हड़ताल नोटिस पर जोर
BMS ने ‘कामगार’ (Worker) की परिभाषा में पर्यवेक्षक (Supervisor) के लिए ₹18,000 की वेतन सीमा बढ़ाने की मांग की। साथ ही हड़ताल के अधिकार से संबंधित नोटिस नियमों में भी ढील देने पर जोर दिया गया। ये सभी मांगें BMS द्वारा बैठक में श्रम मंत्री के समक्ष रखे गए प्रमुख बिंदुओं में शामिल थीं।
आगे Occupational Safety पर होगी चर्चा
BMS के अनुसार, वार्ता के अगले चरण में व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशा संहिता (Occupational Safety, Health and Working Conditions Code) के श्रमिक-विरोधी प्रावधानों पर भी केंद्रीय नेतृत्व और श्रम मंत्री के बीच उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की जाएगी।
BMS ने कहा है कि वह देश के करोड़ों श्रमिकों के अधिकारों, सामाजिक सुरक्षा और रोजगार की गारंटी के लिए अपना संघर्ष जारी रखेगा।
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