नागपुर, 10 जुलाई। राजनीति दलों के नेता हों या फिर श्रमिक संगठनों के, कुछेक में श्रेय लेने के बड़े ही सटीक गुण होते हैं। इस मामले में BMS से सम्बद्ध ABKMS के लीडर्स एक कदम आगे हैं। मामला गुरुवार को डब्ल्यूसीएल (WCL) में आयोजित सीएमपीएफओ (CMPFO) की बैठक से जुड़ा है।
कोयला मंत्रालय (Ministry of Coal) की अपर सचिव रूपिंदर बरार ने नागपुर स्थित डब्ल्यूसीएल मुख्यालय में सीएमपीएफओ के क्षेत्रीय आयुक्त के साथ एक बैठक की। रूपिंदर बरार, सीएमपीएफओ की प्रभारी भी हैं।
इस बैठक में कोयला कामगारों की भविष्य निधि और पेंशन संबंधी मुद्दों सहित प्रमुख कर्मचारी कल्याण मामलों पर चर्चा हुई। बैठक में निदेशक (तकनीकी/संचालन) अनिल कुमार सिंह, महाप्रबंधक (मानव संसाधन)/निदेशक (मानव संसाधन) के तकनीकी सहायक एके सिंह, अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के उप महामंत्री एवं बीओटी सदस्य आशीष मूर्ति और डब्ल्यूसीएल के अन्य अधिकारी भी मौजूद थे।
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इधर, सोशल मीडिया पर बैठक से संबंधित एक प्रेस विज्ञप्ति प्रसारित होती है। इसमें बताया गया है कि गुरुवार को डब्ल्यूसीएल मुख्यालय में आयोजित हुई सीएमपीएफओ की बैठक अखिल भारतीय खदान मजदूर संघ के उप महामंत्री आशीष मूर्ति की पहल पर आयोजित हुई थी। जबकि हकीकत इससे दूर है। आशिष मूर्ति बैठक में इसलिए उपस्थित हुए क्योंकि वे बीओटी सदस्य हैं।
पूर्व में जब सीएमपीएफओ से संबंधित पेंशन स्थिरता कमेटी की बैठकें आयोजित की गईं थीं तब इसके सदस्य आशीष मूर्ति और के. लक्ष्मा रेड्डी अनुपस्थित रहे। जबकि पेंशन स्थिरता कमेटी की बैठकेंं अति महत्वपूर्ण थीं। इसी कमेटी ने पेंशन फंड में 10 रुपये प्रति टन का अंशदान देने की अनुशंसा की थी, इसके बाद सीआईएल प्रबंधन ने इसे जारी करना भी शुरू कर दिया। गुरुवार को आयोजित हुई रूटिन बैठक को आशीष मूर्ति अपनी पहल बताकर श्रेय लेने होड़ में जुटे हैं।










