इंटक की एसईसीएल प्रबंधन को चेतावनी, छत्तीसगढ़ के सीपीपी उद्योगों को कोयला नहीं दिया तो होगा आंदोलन, पीएम को लिखा पत्र

छत्तीसगढ़ में स्थित नॉन पावर सेक्टर सहित अन्य छोटे बड़े उद्योगों को एसईसीएल द्वारा अनुबंध के अनुरूप कोयला आपूर्ति नहीं किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

रायपुर, 06 फरवरी। छत्तीसगढ़ में स्थित नॉन पावर सेक्टर सहित अन्य छोटे बड़े उद्योगों को एसईसीएल द्वारा अनुबंध के अनुरूप कोयला आपूर्ति नहीं किए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इंटक के राष्ट्रीय महासचिव एवं छत्तीसगढ़ के अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने इस मुद्दे को जोरशोर से उठाया है।

श्री सिंह ने प्रधानमंत्री, केन्द्रीय कोयला मंत्री, श्रम मंत्री, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री व श्रम मंत्री, कोल इंडिया के चेयरमैन, एसईसीएल के सीएमडी इस विषय को लेकर पत्र लिखा है।

पत्र में कहा गया है कि एसईसीएल द्वारा उत्पादित कोयले का उपयोग छत्तीसगढ़ स्थित उद्योगों और राज्य के बाहर अन्य देशों में किया जाता है। पिछले एक वर्ष के दौरान एसईसीएल प्रबंधन की असंवेदनशीलता के कारण छत्तीसगढ़ स्थित उद्योगों को कोयले की आपूर्ति में लगातार कटौती हुई है, किंतु छत्तीसगढ़ के बाहर लगातार कोयला भेजा जा रहा है। इस कारण छत्तीसगढ़ के ऊपर गंभीर नकारात्मक असर पड़ रहा है। एसईसीएल प्रबंधन द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य के हितों की जानबूझकर अनदेखी की जा रही है। इस मनमानी की ओर ध्यान देने वाला कोई नहीं है। एसईसीएल छत्तीसगढ़ राज्य के विकास को बाधित करने का कार्य कर रहा।

इंटक नेता ने बताया कि देश के कुल कोयला भंडार का 18 प्रतिशत हिस्सा यानी 56 बिलियन टन कोयला छत्तीसगढ़ में है। राज्य के 250 से अधिक विद्युत संयंत्रों पर आधारित उद्योगों को सुचारू रूप से चलाने के लिए लिए 32 मिलियन टन कोयले की आवश्यकता है, जो एसईसीएल के उत्पादन का मात्र 19 प्रतिशत है। जबकि एसईसीएल का वार्षिक उत्पादन लक्ष्य 165 मिलियन टन है।

वर्तमान में इतने कोयले का उत्पादन होने के बावजूद भी छत्तीसगढ़ के उद्योगों को कोयला नहीं मिल पा रहा है। किसी भी आईपीपी विद्युत संयंत्रों में 15 से 20 दिनों का कोयला भंडारण नहीं है। जबकि राज्य के सीपीपी आधारित नॉन पावर सेक्टर के लगभग 4000 मेगावाट बिजली उत्पादन करते हैं। इन उद्योगों के लिए एसईसीएल द्वारा किए गए अनुबंध के अनुसार कोयला नहीं दिया जा रहा है। जरूरत का पर्याप्त कोयला नहीं मिलने के कारण नॉन पावर सेक्टर के समक्ष समस्या उत्पन्न हो रही है।

श्री सिंह ने बताया कि विद्युत संयंत्र में कोयला भंडारण की स्थिति अपेक्षा के अनुरूप पर्याप्त ना होने के बावजूद भी एसईसीएल प्रबंधन द्वारा राज्य के उद्योगों के हितों के विपरीत राज्य के बाहर कोयला भेजा जा रहा है, जो अत्यंत चिंताजनक है।

इंटक नेता ने मांग की है कि छत्तीसगढ़ के उद्योगों की रक्षा के लिए रोड एवं रेल सेल के जरिए कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। कोयला नहीं मिलने से छत्तीसगढ़ के विभिन्न उद्योगों को बंद करने की स्थिति निर्मित हो जाएगी, जिससे हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी चली जाएगी और छत्तीसगढ़ का औद्योगिक विकास प्रभावित होगा। बेरोजगारी की समस्या के साथ राज्य की कानून-व्यवस्था बिगड़ने की प्रबल संभावना है।

इंटक नेता ने चेतावानी देते हुए कहा कि राज्य के उद्योगों को अनुबंध के अनुरूप कोयला आपूर्ति नहीं की गई तो एसईसीएल मुख्यालय का घेराव किया जाएगा तथा अन्य राज्यों को कोयला आपूर्ति वोल वाहनों का आवागमन बाधित किया जाएगा।

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