Tuesday, September 15, 2026
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जर्मनी में भारतीय नर्सों का भविष्य दांव पर? ILO– BMS ने सुरक्षा को लेकर बजाई खतरे की घंटी

उन्होंने कहा कि आज श्रमिकों का अंतरराष्ट्रीय प्रवासन मजबूरी नहीं, बल्कि सम्मानजनक और सरकार समर्थित रोजगार का माध्यम बन चुका है

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हैदराबाद | IndustrialPunch : भारतीय स्वास्थ्य एवं नर्सिंग क्षेत्र के उन श्रमिकों की सुरक्षा, जागरूकता और अधिकारों को मजबूत करने के उद्देश्य से अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने हैदराबाद में “Pre-Departure Orientation of Indian Health and Care Workers Migrating to Germany” विषय पर राष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में जर्मनी जाने वाले भारतीय नर्सों और हेल्थकेयर कर्मियों के लिए विशेष मार्गदर्शिका (Guiding Manual) तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण चर्चा हुई।

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कार्यशाला का उद्घाटन ILO दक्षिण एशिया की निदेशक सुश्री मिचिको मियामोटो ने ऑनलाइन किया। उद्घाटन सत्र में भारतीय मजदूर संघ (BMS) के अखिल भारतीय राष्ट्रीय सचिव एडवोकेट अनिल धुमाने ने श्रमिक प्रवासन, सामाजिक सुरक्षा और ट्रेड यूनियनों की भूमिका पर विस्तार से अपने विचार रखे।

उन्होंने कहा कि आज श्रमिकों का अंतरराष्ट्रीय प्रवासन मजबूरी नहीं, बल्कि सम्मानजनक और सरकार समर्थित रोजगार का माध्यम बन चुका है। विशेष रूप से जर्मनी में स्वास्थ्य एवं केयर सेक्टर में भारतीय नर्सों और प्रशिक्षित कर्मियों की भारी मांग है। महाराष्ट्र सरकार ने जर्मनी के साथ समझौता कर लगभग 10,000 नर्सों और ड्राइवर-कम-केयर वर्कर्स को भेजने की योजना बनाई है, जिसके लिए ₹78 करोड़ का बजट और 15 भाषा प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किए गए हैं।

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एडवोकेट धुमाने ने कहा कि खाड़ी देशों, मर्चेंट शिपिंग और अन्य सेवा क्षेत्रों में कार्यरत भारतीय श्रमिकों को अक्सर वेतन न मिलना, अनुबंध समाप्त होने के बाद स्वदेश वापसी में कठिनाई, सेवा शर्तों का उल्लंघन और सामाजिक सुरक्षा से वंचित होने जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे में ILO की पहल अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे नियोक्ताओं और मेजबान देशों की जवाबदेही भी बढ़ती है।

उन्होंने Pre-Departure Orientation (PDOT) में छह महत्वपूर्ण विषयों को अनिवार्य रूप से शामिल करने की मांग की :

  • पासपोर्ट, वीजा और स्थानीय कानूनों की जानकारी।
  • जर्मनी के श्रम कानून, वेतन, कार्यस्थल सुरक्षा और शिकायत व्यवस्था।
  • भारतीय दूतावास से मिलने वाली सहायता।
  • जर्मनी में ट्रेड यूनियन से जुड़ने की प्रक्रिया।
  • विदेश से लौटे श्रमिकों के अनुभव साझा करने के सत्र।
  • भारत और जर्मनी दोनों में उपलब्ध 24×7 डिजिटल सहायता पोर्टल की स्थापना।

उन्होंने यह भी बताया कि G20 के दौरान L20 घोषणा-पत्र तथा हाल ही में आयोजित BRICS ट्रेड यूनियन फोरम में BMS ने सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा की अंतरराष्ट्रीय पोर्टेबिलिटी, महिला श्रमिकों की सुरक्षा और कौशल विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था।

इस कार्यशाला में BMS, INTUC, AITUC, HMS, CITU, SEWA, PSI सहित विभिन्न ट्रेड यूनियनों के लगभग 55 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। साथ ही केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना की राज्य सरकारों के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन ILO और ट्रेड यूनियनों के बीच आयोजित राउंड टेबल सम्मेलन तथा संयुक्त प्रेस वक्तव्य जारी किए जाने के साथ हुआ।

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जर्मनी सहित विकसित देशों में भारतीय नर्सों और हेल्थकेयर कर्मियों की बढ़ती मांग के बीच यह कार्यशाला केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि सुरक्षित, सम्मानजनक और अधिकार-आधारित अंतरराष्ट्रीय श्रमिक प्रवासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यदि सुझाए गए उपाय लागू होते हैं, तो विदेश जाने वाले भारतीय श्रमिकों को शोषण से बचाने और उन्हें बेहतर कानूनी एवं सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने में बड़ी मदद मिल सकती है।

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