बिलासपुर | Industrial Punch : साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) ने वैज्ञानिक खदान बंदी (Scientific Mine Closure) के क्षेत्र में देशभर में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। कोल इंडिया की सहायक कंपनियों में SECL अब भारत की अग्रणी वैज्ञानिक खदान बंदी कंपनी बनकर उभरी है। कंपनी अब तक 28 परित्यक्त खदानों का वैज्ञानिक तरीके से बंदीकरण कर चुकी है, जो देश में वैज्ञानिक रूप से बंद की गई कुल खदानों का लगभग 67 प्रतिशत है।
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सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि वित्त वर्ष 2025-26 में अकेले 25 परित्यक्त खदानों को वैज्ञानिक रूप से बंद किया गया, जो भारत में किसी भी संगठन द्वारा एक वर्ष में हासिल की गई अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
SECL का मानना है कि खदान बंदी केवल खनन कार्य का अंत नहीं, बल्कि भूमि और पर्यावरण को नई उपयोगिता देने की शुरुआत है। इसी सोच के तहत कंपनी बंद की गई खदानों को सुरक्षित बनाकर उन्हें भविष्य में जनहित और विकास कार्यों के लिए तैयार कर रही है।
54 खदानों की योजना, चरणबद्ध तरीके से होगा काम
कंपनी ने वैज्ञानिक बंदी के लिए चिन्हित 54 परित्यक्त खदानों में से वित्त वर्ष 2024-25 में 3 तथा 2025-26 में 25 खदानों को बंद किया है। अब 2026-27 में 11 और 2027-28 में शेष 15 खदानों को बंद करने का लक्ष्य तय किया गया है।
खदानें बन रहीं सोलर पार्क, इको पार्क और जनसुविधा केंद्र
SECL बंद खदानों को विकास के नए केंद्रों में बदल रहा है। बिश्रामपुर क्षेत्र में केनापारा इको पार्क तैयार किया जा चुका है, जबकि विवेक नगर भूमिगत खदान में 5 मेगावाट सौर ऊर्जा परियोजना विकसित की जा रही है।
इसके अलावा :
- भटगांव और बिश्रामपुर में 20-20 मेगावाट के सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित।
- पिनौरा भूमिगत खदान में 40 मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट प्रगति पर।
- जमुना और गोविंदा भूमिगत खदानों में 55 मेगावाट क्षमता की नई सौर परियोजनाओं की योजना।
स्कूल, पार्क, अस्पताल और बाजार में बदलीं बंद खदानें
वैज्ञानिक रूप से बंद की गई खदानों का पुनर्प्रयोजन कर उन्हें जनोपयोगी परिसंपत्तियों में बदला जा रहा है।
- कोरबा 3 एवं 4 भूमिगत खदान की भूमि को बाल विहार उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शामिल किया गया।
- नॉर्थ झगराखंड क्षेत्र में सार्वजनिक उद्यान और जल शोधन संयंत्र विकसित।
- सुभाष इंक्लाइन के पुराने सेवा भवन को नगर निगम के जल शोधन संयंत्र में बदला गया।
- साउथ झगराखंड क्षेत्र में CISF पोस्ट स्थापित।
- बांकी क्षेत्र में स्वास्थ्य केंद्र, साप्ताहिक बाजार और सामुदायिक केंद्र विकसित किए गए।
35 हजार पौधे, मत्स्य पालन और हजारों लोगों के लिए रोजगार
पर्यावरण संरक्षण के तहत चचाई भूमिगत खदान में 35,000 पौधों का वृक्षारोपण किया गया है। कई अन्य बंद खदान क्षेत्रों में भी हरित क्षेत्र विकसित किए जा रहे हैं।
SECL पुनर्वासित खदान क्षेत्रों में कंप्यूटर प्रशिक्षण, सिलाई, मशरूम उत्पादन, हस्तशिल्प, अचार निर्माण जैसे कौशल विकास कार्यक्रम चला रहा है।
कंपनी मत्स्य पालन परियोजनाओं के माध्यम से प्रतिवर्ष 25 टन मछली उत्पादन का लक्ष्य लेकर चल रही है, जिससे 206 लोगों को रोजगार और प्रत्येक परिवार को लगभग 3 लाख रुपये वार्षिक आय मिलने की संभावना है।
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CMD हरीश दुहन बोले— खदान बंदी नहीं, नए विकास की शुरुआत
SECL के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक हरीश दुहन ने कहा कि वैज्ञानिक खदान बंदी केवल खनन का समापन नहीं बल्कि जिम्मेदार और सतत विकास की नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य पुनर्वासित खदान क्षेत्रों को स्वच्छ ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, रोजगार और सामुदायिक विकास के केंद्र के रूप में विकसित करना है।
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