Tuesday, July 21, 2026
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Coal Crime Files – Episode 13 : कोयला कंपनियों के नाम पर कैसे भेजे जाते हैं नकली टेंडर और सप्लाई ऑर्डर? 

देशभर में समय-समय पर सरकारी कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों के नाम पर इस तरह की साइबर ठगी के मामले सामने आते रहे हैं।

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IndustrialPunch Investigative Desk : “बधाई हो… आपकी कंपनी को Coal Company का ₹2 करोड़ का ऑर्डर मिल गया!”, एक सप्लायर के ई-मेल पर अचानक एक Purchase Order (PO) आता है।

ऊपर कंपनी का लोगो, नीचे अधिकारी के हस्ताक्षर और साथ में लिखा होता है— “Security Deposit जमा करें, उसके बाद Supply Order जारी कर दिया जाएगा।” सप्लायर खुश हो जाता है।वह लाखों रुपये जमा कर देता है…, लेकिन कुछ दिनों बाद पता चलता है कि पूरा टेंडर और सप्लाई ऑर्डर ही फर्जी था। देशभर में समय-समय पर सरकारी कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों के नाम पर इस तरह की साइबर ठगी के मामले सामने आते रहे हैं।

कैसे होता है यह फर्जीवाड़ा?

  • फर्जी ई-मेल आईडी : असली कंपनी जैसी दिखने वाली ई-मेल आईडी बनाकर टेंडर भेजे जाते हैं।
  • नकली टेंडर दस्तावेज : कंपनी के लोगो, लेटरहेड और फॉर्मेट की नकल कर Tender Document तैयार किया जाता है।
  • फर्जी Purchase Order (PO) : सप्लायर को यह विश्वास दिलाया जाता है कि उसकी कंपनी का चयन हो चुका है।
  • सिक्योरिटी डिपॉजिट की मांग : EMD, Performance Security, Registration Fee या Processing Charge के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं।
  • फर्जी बैंक खाता : राशि किसी निजी बैंक खाते या संदिग्ध खाते में जमा कराने के लिए कहा जाता है।

ऐसे पहचानें फर्जी टेंडर

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  • आधिकारिक वेबसाइट का उल्लेख न हो।
  • ई-मेल डोमेन संदिग्ध हो।
  • जल्दी भुगतान करने का दबाव बनाया जाए।
  • निजी खाते में पैसे जमा कराने को कहा जाए।
  • संपर्क नंबर केवल मोबाइल हो।
  • दस्तावेज में भाषा या फॉर्मेट संबंधी त्रुटियां हों।

असली टेंडर प्रक्रिया कैसी होती है?

  • आधिकारिक ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर प्रकाशित होती है।
  • निर्धारित समयसीमा के अनुसार संचालित होती है।
  • सभी शर्तें सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होती हैं।
  • अधिकृत माध्यमों से ही संवाद किया जाता है।
  • भुगतान और दस्तावेजी प्रक्रिया नियमानुसार होती है।

कंपनियां क्या सलाह देती हैं?

  • केवल आधिकारिक वेबसाइट या ई-टेंडर पोर्टल देखें।
  • ई-मेल डोमेन की पुष्टि करें।
  • किसी निजी खाते में भुगतान न करें।
  • संदिग्ध कॉल या ई-मेल की सूचना कंपनी को दें।
  • किसी भी Purchase Order की आधिकारिक पुष्टि करें।

यदि ठगी हो जाए तो क्या करें?

  • तुरंत बैंक को सूचना दें।
  • साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
  • निकटतम साइबर पुलिस स्टेशन में रिपोर्ट करें।
  • ई-मेल, बैंक ट्रांजेक्शन और सभी दस्तावेज सुरक्षित रखें।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आज AI आधारित दस्तावेज, नकली वेबसाइट और फर्जी ई-मेल पहले की तुलना में अधिक वास्तविक दिखाई देते हैं। इसलिए किसी भी टेंडर, Purchase Order या सप्लाई ऑर्डर की पुष्टि केवल संबंधित कंपनी के आधिकारिक माध्यमों से ही करनी चाहिए।

फर्जी टेंडर से बचने के 7 उपाय

  • केवल आधिकारिक ई-टेंडर पोर्टल देखें।
  • ई-मेल डोमेन सत्यापित करें।
  • निजी बैंक खाते में भुगतान न करें।
  • कंपनी से PO की पुष्टि करें।
  • दस्तावेजों का सत्यापन करें।
  • जल्दबाजी में निर्णय न लें।
  • साइबर ठगी की तुरंत शिकायत करें।

Industrial Punch Conclusion

फर्जी टेंडर और सप्लाई ऑर्डर के नाम पर होने वाली ठगी केवल आर्थिक नुकसान नहीं पहुंचाती, बल्कि उद्योगों, सप्लायरों और छोटे कारोबारियों के विश्वास को भी प्रभावित करती है। डिजिटल युग में किसी भी टेंडर या Purchase Order पर कार्रवाई करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपाय है।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट विभिन्न सरकारी चेतावनियों, सार्वजनिक रूप से उपलब्ध साइबर अपराध मामलों, सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा जारी एडवाइजरी तथा मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य उद्योग जगत, सप्लायरों और ठेकेदारों को जागरूक करना है। इसका संबंध किसी विशेष व्यक्ति या संस्था पर आरोप लगाने से नहीं है।

अगले एपिसोड में…

Coal Crime Files – Episode 14 : ई-ऑक्शन में फर्जीवाड़ा और साइबर ठगी कोयला ई-ऑक्शन के नाम पर कैसे ठगे जाते हैं व्यापारी और खरीदार?

इसे भी पढ़ें: 

 

indus

Coal Crime Files– Episode 1 : कोयला चोरी का काला कारोबार, खदान से बाजार तक कैसे चलता है अवैध कारोबार?

Coal Crime Files – Episode 2 : फर्जी चालान, ई-परमिट और कागजों का खेल

Coal Crime Files – Episode 3 : अवैध खनन, मौत की सुरंगें, बंद खदानों में कौन करता है खनन? 

Coal Crime Files – Episode 4 : रेलवे रैक से कोयला चोरी का पूरा नेटवर्क, खदान से बिजलीघर तक… कहां और कैसे होती है चोरी?

Coal Crime Files – Episode 5 : ट्रांसपोर्ट सिंडिकेट की अंदरूनी कहानी, खदान से गंतव्य तक… कोयला परिवहन की सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?

Coal Crime Files – Episode 6 : कोल माफिया कैसे बनाते हैं अपना नेटवर्क? अवैध कारोबार कैसे संगठित रूप लेता है? 

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Coal Crime Files – Episode 9 : स्क्रैप माफिया की कहानी, बंद मशीनों से लेकर यार्ड तक… कैसे बनता है औद्योगिक स्क्रैप अवैध कारोबार का हिस्सा?

Coal Crime Files – Episode 10 : HEMM मशीनों के पार्ट्स की चोरी, करोड़ों की मशीनों पर चोरों की नजर क्यों? 

Coal Crime Files – Episode 11 : डीजल चोरी का खेल, खदानों की मशीनों से लेकर टैंकरों तक… कैसे होती है ईंधन की चोरी?

Coal Crime Files – Episode 12 : फर्जी नौकरी और भर्ती घोटाले, कोयला कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर कैसे होती है ठगी? 

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