Monday, September 14, 2026
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Coal Crime Files – Episode 14 : ई-ऑक्शन में फर्जीवाड़ा और साइबर ठगी, कोयला ई-ऑक्शन के नाम पर कैसे ठगे जाते हैं व्यापारी और खरीदार? 

कोयला ई-ऑक्शन एक डिजिटल प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र खरीदार ऑनलाइन बोली लगाकर कोयला खरीदते हैं।

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(IndustrialPunch Investigative Desk) : “आपकी ई-ऑक्शन बोली सफल रही… अब तुरंत भुगतान करें!”, एक व्यापारी के ई-मेल पर संदेश आता है— “Congratulations! आपकी Coal E-Auction Bid Accept हो गई है। निर्धारित समय के भीतर ₹18 लाख जमा करें।”

ई-मेल में कंपनी का लोगो, बोली का विवरण और बैंक खाता भी दिया गया है। व्यापारी बिना पुष्टि किए भुगतान कर देता है। कुछ घंटे बाद पता चलता है कि न तो कोई ई-ऑक्शन था और न ही वह बैंक खाता कंपनी का था।

देशभर में समय-समय पर सरकारी कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों के नाम पर इस तरह की साइबर ठगी के मामले सामने आते रहे हैं।

कोयला ई-ऑक्शन क्या है?

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कोयला ई-ऑक्शन एक डिजिटल प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से निर्धारित नियमों के अनुसार पात्र खरीदार ऑनलाइन बोली लगाकर कोयला खरीदते हैं।

इस प्रक्रिया में ऑनलाइन पंजीकरण, पात्रता सत्यापन, ई-बोली, भुगतान, आवंटन डिस्पैच जैसे चरण शामिल होते हैं।

साइबर ठग कैसे बनाते हैं शिकार?

  • फर्जी ई-ऑक्शन वेबसाइट : असली वेबसाइट जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट बनाकर लॉगिन करवाया जाता है।
  • फर्जी ई-मेल : कंपनी के नाम से मिलता-जुलता ई-मेल भेजकर भुगतान करने के लिए कहा जाता है।
  • नकली भुगतान लिंक : व्यापारी को फर्जी Payment Gateway या QR Code भेजा जाता है।
  • फर्जी बैंक खाता : सिक्योरिटी डिपॉजिट या ई-ऑक्शन फीस के नाम पर निजी खाते में पैसे जमा कराने का प्रयास किया जाता है।
  • मोबाइल कॉल और WhatsApp : अपने आपको कंपनी का अधिकारी बताकर जल्द भुगतान करने का दबाव बनाया जाता है।

पहचानें ऐसे फर्जीवाड़े के संकेत

  • वेबसाइट का URL अलग हो।
  • निजी बैंक खाते में भुगतान मांगा जाए।
  • WhatsApp पर लिंक भेजा जाए।
  • तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाया जाए।
  • ई-मेल डोमेन संदिग्ध हो।
  • दस्तावेजों में त्रुटियां हों।

सुरक्षित लेन-देन कैसे करें?

  • केवल आधिकारिक ई-ऑक्शन पोर्टल का उपयोग करें।
  • वेबसाइट का URL ध्यान से जांचें।
  • भुगतान से पहले बैंक खाते की पुष्टि करें।
  • लॉगिन OTP या पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें।
  • संदिग्ध कॉल पर तुरंत भरोसा न करें।
  • हर दस्तावेज की पुष्टि करें।

यदि साइबर ठगी हो जाए तो क्या करें?

  • तुरंत बैंक को सूचना दें।
  • साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें।
  • राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
  • भुगतान रसीद, ई-मेल और चैट सुरक्षित रखें।
  • निकटतम साइबर पुलिस स्टेशन में शिकायत करें।

तकनीक से कैसे बढ़ी सुरक्षा?

  • SSL सुरक्षित वेबसाइट
  • मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA)
  • डिजिटल प्रमाणपत्र
  • एन्क्रिप्टेड भुगतान प्रणाली
  • लॉगिन अलर्ट
  • साइबर मॉनिटरिंग

विशेषज्ञ क्या कहते हैं?

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आजकल नकली वेबसाइट और फर्जी ई-मेल इतनी वास्तविक दिखाई देते हैं कि अनुभवी व्यापारी भी भ्रमित हो सकते हैं। इसलिए किसी भी भुगतान से पहले वेबसाइट, बैंक खाते और दस्तावेजों की आधिकारिक पुष्टि करना बेहद जरूरी है।

ई-ऑक्शन में सुरक्षित रहने के 7 नियम

  • केवल आधिकारिक पोर्टल से लॉगिन करें।
  • URL ध्यान से जांचें।
  • OTP और पासवर्ड साझा न करें।
  • निजी खाते में भुगतान न करें।
  • बैंक खाते की पुष्टि करें।
  • संदिग्ध ई-मेल की जांच करें।
  • साइबर ठगी की तुरंत शिकायत करें।

Industrial Punch Conclusion

डिजिटल प्लेटफॉर्म ने कोयला ई-ऑक्शन प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी के नए तरीके भी सामने आए हैं। थोड़ी-सी लापरवाही लाखों रुपये का नुकसान करा सकती है। इसलिए आधिकारिक पोर्टल, सुरक्षित भुगतान प्रणाली और साइबर जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा कवच हैं।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट विभिन्न सरकारी एडवाइजरी, साइबर अपराध से संबंधित सार्वजनिक मामलों, सार्वजनिक उपक्रमों की चेतावनियों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार की गई है। इसका उद्देश्य व्यापारियों, उद्योगों और आम नागरिकों को साइबर ठगी के प्रति जागरूक करना है। इसका संबंध किसी विशेष व्यक्ति, कंपनी या मामले पर आरोप लगाने से नहीं है।

अगले एपिसोड में…

Coal Crime Files – Episode 15 : कोयला परिवहन में ओवरलोडिंग और अंडरलोडिंग का खेल
वजन में हेरफेर से कैसे होता है करोड़ों का नुकसान?

इसे भी पढ़ें:

Coal Crime Files– Episode 1 : कोयला चोरी का काला कारोबार, खदान से बाजार तक कैसे चलता है अवैध कारोबार?

Coal Crime Files – Episode 2 : फर्जी चालान, ई-परमिट और कागजों का खेल

Coal Crime Files – Episode 3 : अवैध खनन, मौत की सुरंगें, बंद खदानों में कौन करता है खनन? 

Coal Crime Files – Episode 4 : रेलवे रैक से कोयला चोरी का पूरा नेटवर्क, खदान से बिजलीघर तक… कहां और कैसे होती है चोरी?

Coal Crime Files – Episode 5 : ट्रांसपोर्ट सिंडिकेट की अंदरूनी कहानी, खदान से गंतव्य तक… कोयला परिवहन की सबसे बड़ी चुनौतियां क्या हैं?

Coal Crime Files – Episode 6 : कोल माफिया कैसे बनाते हैं अपना नेटवर्क? अवैध कारोबार कैसे संगठित रूप लेता है? 

Coal Crime Files – Episode 7 : कोयले का काला बाजार, चोरी का कोयला आखिर पहुंचता कहां है?

Coal Crime Files – Episode 8 : कोयला डिपो का अवैध कारोबार, अस्थायी भंडारण से अवैध सप्लाई तक

Coal Crime Files – Episode 9 : स्क्रैप माफिया की कहानी, बंद मशीनों से लेकर यार्ड तक… कैसे बनता है औद्योगिक स्क्रैप अवैध कारोबार का हिस्सा?

Coal Crime Files – Episode 10 : HEMM मशीनों के पार्ट्स की चोरी, करोड़ों की मशीनों पर चोरों की नजर क्यों? 

Coal Crime Files – Episode 11 : डीजल चोरी का खेल, खदानों की मशीनों से लेकर टैंकरों तक… कैसे होती है ईंधन की चोरी?

Coal Crime Files – Episode 12 : फर्जी नौकरी और भर्ती घोटाले, कोयला कंपनियों में नौकरी दिलाने के नाम पर कैसे होती है ठगी? 

Coal Crime Files – Episode 13 : कोयला कंपनियों के नाम पर कैसे भेजे जाते हैं नकली टेंडर और सप्लाई ऑर्डर? 

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